चीन-बांग्लादेश की तीस्ता नदी परियोजना पर बातचीत भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत के ‘चिकन नेक’ यानी सिलिगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब है। इस कॉरिडोर से ही भारत का पूर्वोत्तर बाकी देश से जुड़ा है, और यहां किसी बाहरी शक्ति की मौजूदगी भारत की सुरक्षा व सामरिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
🔑 तीस्ता नदी परियोजना: क्या है मामला?
- स्थान: तीस्ता नदी सikkim और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश जाती है।
- परियोजना: Teesta Comprehensive Management and Restoration Project (TRCMRP) – इसमें नदी का प्रशिक्षण, ड्रेजिंग, बांध निर्माण, भूमि पुनर्वास और जल प्रवाह प्रबंधन शामिल है।
- चीन की भूमिका: बांग्लादेश ने चीन की POWERCHINA कंपनी के साथ MoU बढ़ाया है। चीन इसे बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) से जोड़कर देख रहा है।
🇮🇳 भारत की चिंताएँ
- सिलिगुड़ी कॉरिडोर (‘चिकन नेक’):
- यह मात्र 22 किमी चौड़ा भू-भाग है जो भारत के पूर्वोत्तर को मुख्य भूमि से जोड़ता है।
- चीन की मौजूदगी यहां भारत के लिए रणनीतिक खतरा बन सकती है।
- जल सुरक्षा: भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे पर पहले से ही विवाद है। चीन की भागीदारी से भारत की जल कूटनीति कमजोर हो सकती है।
- भूराजनीतिक दबाव: चीन पहले ही बांग्लादेश में चिटगांव नौसैनिक अड्डा और अन्य बंदरगाह परियोजनाओं में निवेश कर चुका है। अब तीस्ता परियोजना से उसका प्रभाव और बढ़ेगा।
⚖️ तुलना: भारत बनाम चीन की पेशकश
| पहलू | भारत | चीन |
|---|---|---|
| तकनीकी सहायता | 2024 में भारत ने तीस्ता बेसिन के लिए तकनीकी व संरक्षण सहयोग की पेशकश की थी। | POWERCHINA के साथ MoU; बड़े पैमाने पर निवेश और BRI से जुड़ा। |
| रणनीतिक उद्देश्य | जल साझेदारी और पड़ोसी सहयोग | क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाना, BRI विस्तार |
| जोखिम | सीमित संसाधन, राजनीतिक असहमति | भारत के ‘चिकन नेक’ पर दबाव, सुरक्षा खतरा |
🚨 संभावित खतरे
- सैन्य दृष्टिकोण: चीन की इंजीनियरिंग व इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूदगी भविष्य में सैन्य लॉजिस्टिक्स का आधार बन सकती है।
- कूटनीतिक दबाव: बांग्लादेश का झुकाव चीन की ओर भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव पैदा कर सकता है।
- जल विवाद: भारत के उत्तर बंगाल और सikkim में सिंचाई प्रभावित हो सकती है।
📌 निष्कर्ष
भारत को इस परियोजना पर कड़ी निगरानी रखनी होगी।
- रणनीतिक विकल्प: मल्टी-अलाइनमेंट, बांग्लादेश के साथ जल समझौते को आगे बढ़ाना, और पूर्वोत्तर में इंफ्रास्ट्रक्चर व सुरक्षा को मजबूत करना।
- कूटनीतिक कदम: बांग्लादेश को यह भरोसा दिलाना कि भारत उसकी जल व विकास जरूरतों में विश्वसनीय साझेदार है।




