Ranchi News: झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के केंद्रीय कमेटी सदस्य और ₹1 करोड़ के इनामी नक्सली Misir Besra को संयुक्त अभियान के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया। करीब चार दशक तक माओवादी संगठन में सक्रिय रहे मिसिर बेसरा पर कई राज्यों में हत्या, विस्फोट और सुरक्षा बलों पर हमलों सहित 150 से अधिक मामले दर्ज हैं।
छात्र जीवन से माओवादी संगठन तक का सफर
मिसिर बेसरा छात्र जीवन के दौरान वामपंथी विचारधारा से प्रभावित हुआ। वह माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (MCC) के वरिष्ठ नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के संपर्क में आया और धीरे-धीरे संगठन की गतिविधियों में शामिल हो गया। वर्ष 1985 में सिंदरी में आयोजित संगठन के राष्ट्रीय सम्मेलन में उसने स्वयंसेवक के रूप में काम किया, जबकि 1986 में उसे एमसीसी की प्राथमिक सदस्यता मिली।
Misir Besra ने कोलकाता से संभाली संगठन की जिम्मेदारी
संगठन में सक्रियता बढ़ने के बाद वर्ष 1990 में उसे प्रचार और प्रेस से जुड़े कार्यों के लिए कोलकाता भेजा गया। दो साल बाद लौटने पर उसने रांची और आसपास के इलाकों में संगठन के विस्तार और नए कैडरों की भर्ती का काम संभाला।
झारखंड में मजबूत किया माओवादी नेटवर्क
वर्ष 1997 में Misir Besra ने दक्षिणी छोटानागपुर कमेटी के गठन में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद वर्ष 2000 में झारखंड रीजनल कमेटी के गठन में भी उसकी महत्वपूर्ण भागीदारी रही। 2003 में उसे केंद्रीय कमेटी का सदस्य बनाया गया और 2004 में विभिन्न नक्सली संगठनों के विलय के बाद उसे संगठन के सैन्य विंग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई।
150 से अधिक मामलों में आरोपी
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मिसिर बेसरा कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा है। उसके खिलाफ झारखंड समेत कई राज्यों में हत्या, विस्फोट, पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले सहित 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
तकनीकी निगरानी से हुई गिरफ्तारी
Ranchi News: झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की लगातार तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर संयुक्त अभियान चलाया गया, जिसके बाद मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के समय उसके साथ संगठन के केवल तीन सदस्य मौजूद थे और किसी के पास हथियार नहीं थे। इसे माओवादी संगठन की कमजोर होती स्थिति का संकेत माना जा रहा है।



